बिजली संकट से हाहाकार : दिल्ली मेट्रो और अस्पतालों पर भी आंच, झारखंड में पार्क में रात बिता रहे लोग; जम्मू में हर आंधे घंटे में कटौती


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प्रचंड गर्मी के बीच बिजली की भारी मांग से देश के अनेक राज्यों में बिजली संकट दिनोंदिन गहरा रहा है। दिल्ली सरकार ने केंद्र को चेताया है कि बिजली की कमी का असर मेट्रो व अस्पतालों के संचालन पर पड़ सकता है। कई राज्यों में बिजली की मांग व आपूर्ति में भारी अंतर होने से घंटों कटौती की जा रही है।

दिल्ली : 6000 मेगावाट तक पहुंची मांग, सरकार ने खड़े किए हाथ
दिल्ली में पारा चढ़ने के साथ ही बिजली की मांग भी बढ़ती जा रही है। चालू माह में पहली बार मांग 6000 मेगावाट तक पहुंच गई। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) के अनुसार बुधवार को मांग 5,769 मेगावाट थी, जो गुरुवार को 3.7 फीसदी और बढ़ गई।  दिल्ली में बिजली की मांग महीने की शुरूआत के बाद से 34 प्रतिशत बढ़ गई है। एक अप्रैल को बिजली की मांग 4,469 मेगावाट थी। दिल्ली में इस साल रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। इस कारण लोग अपने घरों और ऑफिसों में कूलर-एसी का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं और इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ा रहा है। अधिकारी के मुताबिक इस साल अधिकतम मांग 8200 मेगावाट तक रह सकती है। 
 

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री ने केंद्र को लिखा पत्र 
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने पर्याप्त कोयला आपूर्ति को लेकर केंद्र को पत्र लिखा है। इसमें लिखा गया है कि दादरी-राष्ट्रीय राजधानी पावर स्टेशन और फिरोज गांधी ऊंचाहार थर्मल पावर प्लांट से बिजली आपूर्ति बाधित होने से दिल्ली मेट्रो, अस्पतालों समेत कई जरूरी संस्थानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में दिक्कत हो सकती है।
 

पंजाब में भी बिजली का संकट लगातार गहरा रहा है। गुरुवार को राज्य में 7500 मेगावाट की अधिकतम मांग के मुकाबले उपलब्धता केवल 4400 मेगावाट की रही। पावरकॉम ने महंगे दाम में बाहर से बिजली खरीदी, लेकिन यह नाकाफी थी। उद्योगों को साढ़े छह घंटे तक की कटौती का सामना करना पड़ा। वहीं गांवों में 12 से 13 घंटे और शहरों में तीन से चार घंटे की कटौती से लोग बेहाल हो उठे। पावरकॉम ने अपनी रोपड़ की दो व लहरा मुहब्बत की चार यूनिटों से 1163 मेगावाट, राजपुरा की तीन, तलवंडी साबो की एक और गोइंदवाल की एक यूनिट से 2186 मेगावाट बिजली प्राप्त की।
हाइडल प्रोजेक्ट से 509 मेगावाट व अन्य सभी स्रोतों को मिलाकर करीब 4400 मेगावाट बिजली ही मिली। पावरकॉम ने बाहर से 2400 मेगावाट बिजली खरीदी भी की, लेकिन 700 मेगावाट बिजली की कमी के चलते पावरकॉम ने उद्योगों, शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की। 
प्लांटों में दो से छह दिन का कोयला बचा
गुरुवार को रोपड़ प्लांट में आठ, लहरा में चार, राजपुरा में 18, तलवंडी साबो में छह और गोइंदवाल में दो दिनों का कोयला शेष बचा था। देश के सभी राज्यों में बिजली की मांग में वृद्धि के कारण अब पावरकॉम को चाहकर भी पूरी बिजली बाहर से नहीं मिल पा रही है। इससे आने वाले धान के सीजन में पंजाब में बिजली की भारी किल्लत पैदा हो सकती है।
 

मध्य प्रदेश में भी संकट गहरा गया है। रोजाना 14 रैक कोयले की जगह प्रदेश को 10 रैक कोयला ही मिल रहा है। इससे परेशानी और बढ़ गई है। आने वाले समय में गंभीर बिजली संकट होने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश में बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट की है, लेकिन 10 हजार मेगावाट बिजली ही मिल रही है। 2000 मेगावाट बिजली की कमी है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों कटौती की जा रही है। एमपी पावर जनरेटिंग कंपनी को थर्मल प्लांट्स चलाने के लिए प्रतिदिन 58 हजार टन कोयले की जरूरत है, लेकिन करीब 50 हजार मीट्रिक टन ही कोयला मिल रहा है।

कहां कितना बचा कोयले का स्टॉक
मप्र के चार थर्मल पॉवर प्लांट में सिंगाजी प्लांट में सिर्फ 4 दिन का स्टॉक ही बचा हुआ है। इस प्लांट की क्षमता 2520 मेगावाट है। वहीं, सतपुड़ा थर्मल पॉवर प्लांट में भी 7 दिन का कोयला बचा है। संजय गांधी प्लांट में भी 26 दिन की जगह सिर्फ 2 दिन का कोयला बचा हुआ है। अमरकंटक प्लांट में 4 दिन का कोयला का स्टॉक बचा है।  

उत्तराखंड में बिजली संकट बढ़ता जा रहा है। राज्य में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच बिजली की मांग 47.7 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। गांव, कस्बों, छोटे शहरों व फर्नेश उद्योग को भारी कटौती का सामना करना पड़ रहा है। 
यूपीसीएल ने बुधवार को बिजली की डिमांड 4.60 करोड़ यूनिट मानते हुए इंतजाम किए थे लेकिन गर्मी में खपत बढ़ने के चलते पूर्ति नहीं हो पाई। नतीजतन ग्रामीण क्षेत्रों में ढाई से तीन घंटे की कटौती हुई। छोटे शहरों में भी दो से तीन घंटे और फर्नेश इंडस्ट्रीज में चार से पांच घंटे की कटौती हुई। हालांकि यूपीसीएल का दावा है कि लगातार तीसरे दिन उद्योगों में किसी तरह की कटौती नहीं की गई।

यूपीसीएल के एसई कॉमर्शियल गौरव शर्मा ने बताया कि बिजली की कमी बरकरार रही या डिमांड इससे भी ऊपर गई तो ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों में दो से तीन घंटे और फर्नेश इंडस्ट्री में चार से पांच घंटे की कटौती की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल उद्योगों को कटौती से मुक्त रखने की कोशिश की जा रही है। किल्लत के बीच इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली के महंगे दाम यूपीसीएल का खजाना खाली कर रहे हैं। रोजाना यूपीसीएल को 13 से 16 करोड़ रुपये की बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिसका रोजाना ही भुगतान किया जा रहा है। 

झारखंड की राजधानी रांची में बिजली गुल होने के बाद  लोग देर रात सड़क पर घूमने या ता पार्क में बैठने के लिए मजबूर हैं। इस दौरान कुछ व्यापारियों ने बिजली संकट के कारण कारोबार चौपट होने की बात कही है।
झारखंड की राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से लगातार बिजली गुल रहने के कारण जहां स्थानीय लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है वहीं व्यापारियों का कारोबार भी ठप होने की कगार पर है। दोपहर में 3-4 घंटे के लिए बिजली कटौती होती है। 

विपक्ष ने खोला मोर्चा
झारखंड में बिजली संकट के चलते राजनीति उफान पर है। विपक्षी दल भाजपा कहा कि गर्मी के इस मौसम में बिजली संकट से आम जनता त्रस्त है। आम लोगों से सीधे तौर पर जुड़े इस मुद्दे पर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। 
 

हरियाणा के बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने कहा कि अगले पांच दिनों में प्रदेश में बिजली समस्या का निराकरण कर लिया जाएगा। इस समय प्रदेश में 7 हजार मेगावट बिजली सप्लाई की जा रही है। मांग व आपूर्ति में 500-600 मेगावाट का अंतर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों से बिजली खरीदने को लेकर बातचीत जारी है। बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बिजली निगम के अधिकारियों से भी कहा कि वे फीडर अनुसार मैनेज करें और संबंधित वर्ग को निर्धारित तय अनुसार बिजली आपूर्ति करें।

रिकॉर्ड तोड़ रही गर्मी के बीच जम्मू कश्मीर में बिजली-पानी संकट थम नहीं रहा है। गुस्साए लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। इसके विरोध में लगातार दूसरे दिन लोगों ने आरएस पुरा-सतवारी सड़क के साथ जम्मू के डिग्याना में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बिजली की नियमित आपूर्ति नहीं होने से कारखाने और उद्योग भी बंद हो गए हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। जम्मू शहर में वीरवार को मुश्किल से 10 घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो पाई। हर आधे घंटे के बाद बिजली का अघोषित कट लगाया गया। यही हाल ग्रामीण इलाकों का है, यहां पर बमुश्किल सात से आठ घंटे बिजली आई। प्रदर्शनकारियों में सतवीर कौर, विमला और संसार ने कहा कि पिछले कई दिनों से वे लोग ठीक से सो नहीं पाए हैं। यदि कहीं पर कोई संकट है तो सरकार इसका हल क्यों नहीं निकालती। 

अतिरिक्त बिजली मिलने के बाद भी जम्मू संभाग में बिजली को लेकर हाहाकार कम नहीं हुआ है। हालांकि शुक्रवार को जम्मू संभाग को 100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलना शुरू हो जाएगी। केंद्र ने घोषणा की है कि जम्मू-कश्मीर को 207 मेगावाट की अतिरिक्त सप्लाई होगी। जम्मू और कश्मीर दोनों ही संभाग में बराबर आपूर्ति होगी। जम्मू संभाग में हर रोज 1500 मेगावाट बिजली की मांग है, जबकि गुरुवार को सिर्फ 600 मेगावाट बिजली दी गई है। 

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प्रचंड गर्मी के बीच बिजली की भारी मांग से देश के अनेक राज्यों में बिजली संकट दिनोंदिन गहरा रहा है। दिल्ली सरकार ने केंद्र को चेताया है कि बिजली की कमी का असर मेट्रो व अस्पतालों के संचालन पर पड़ सकता है। कई राज्यों में बिजली की मांग व आपूर्ति में भारी अंतर होने से घंटों कटौती की जा रही है।

दिल्ली : 6000 मेगावाट तक पहुंची मांग, सरकार ने खड़े किए हाथ

दिल्ली में पारा चढ़ने के साथ ही बिजली की मांग भी बढ़ती जा रही है। चालू माह में पहली बार मांग 6000 मेगावाट तक पहुंच गई। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) के अनुसार बुधवार को मांग 5,769 मेगावाट थी, जो गुरुवार को 3.7 फीसदी और बढ़ गई।  दिल्ली में बिजली की मांग महीने की शुरूआत के बाद से 34 प्रतिशत बढ़ गई है। एक अप्रैल को बिजली की मांग 4,469 मेगावाट थी। दिल्ली में इस साल रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। इस कारण लोग अपने घरों और ऑफिसों में कूलर-एसी का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं और इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ा रहा है। अधिकारी के मुताबिक इस साल अधिकतम मांग 8200 मेगावाट तक रह सकती है। 

 
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री ने केंद्र को लिखा पत्र 

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने पर्याप्त कोयला आपूर्ति को लेकर केंद्र को पत्र लिखा है। इसमें लिखा गया है कि दादरी-राष्ट्रीय राजधानी पावर स्टेशन और फिरोज गांधी ऊंचाहार थर्मल पावर प्लांट से बिजली आपूर्ति बाधित होने से दिल्ली मेट्रो, अस्पतालों समेत कई जरूरी संस्थानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में दिक्कत हो सकती है।

 



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